Monday, October 08, 2012

हंगरियन कवि बलाज्स अत्तिला की कविताएँ !

Balázs F. Attila
आज हंगरियन कवि बलाज्स अत्तिला की कविताएँ। अनुवाद किया है युवा कवि-पत्रकार विजया कांडपाल ने : बीइंग पोएट
तुम्हारी याद
तुम्हारी याद, भीतर मेरे
और इसी निरीहता में मैं बुनता दुःख की आधी मौजेक
कवि शैतान होते हैं
बचाए रखना अपनी खूबसूरती उनसे
मैं चूमता धुंए को
इससे पहले के वो खो जाये आसमान की हथेली पर
क्यूंकि सुबह की ओंस को ही बताऊंगा मैं तुम्हारे राज़
मौत का सम्बन्धी
न मैं मुर्दा हूँ
न जिंदा
सीखता हूँ मैं ज़मीन की जुबां
बागी बनने के लिए
मुझे मरना चाहिए बार-बार
भले ही मौत मर जाये मेरे साथ
खाब है यह मेरा के बनूँ मैं मौत का सम्बन्धी
पर अभी वक़्त नहीं आया इसका प्रिय!
इस दुनियाँ में जो खुद को देती है
सूली पर चढ़ा
मौत के लिए
ग्रीष्म
ग्रीष्म तुम्हारे दरवाज़े पर पुता सा
गर्म करता तुम्हारी सीढ़ियों को
जैसे की वो यही चाहता है
वो ढूंढता चाबियाँ
खराब करता इवी की डालियाँ
झुकता
झांकता
देखने के लिए
के क्या तुम खोलोगी दरवाज़ा?
तो झोंक देगा वो आँखों में धुल तुम्हारी
और अगर तुम फलों के स्वाद से भूख मिटाओगी
तो  चुरा लोगी इसकी छाया
और आराम पाओगी इसके बिस्तर पर
अपने बिस्तर सा
परदे के पीछे
कोई नहीं कहता के
नहीं है उसका कोई
वो खोता हुआ बड़ी सी दुनियाँ में
पिर्घलता हुआ झुकते से आसमान में
काँपता सा ख़त मालगाड़ी में बैठा लिखा हुआ
एक संकेत है उस आदमी के इतिहास का
एक खोया सुराग
पर क्या यह सच है
या केवल कल्पना की ज़मीन?
पुरानी सजावटों पर तुड़ा मुड़ा सा वह चेहरा था उस मेज़ पर
जहाँ हमने खाया था अजनबियों की तरह
जहाँ मौत की जवानी ढूंढ़ रही थी अपनी ज़िन्दगी
और जब नहीं ढूंढ़ पाती
अनाथ सी रहती खड़ी
पर जीवित हैं उसके माता- पिता
जो चीज़ हमें दिखा सकती है
नहीं मर रही
और केवल मौत है जो जी जा सकती है
पर क्या इसके संकेत रोक दिए गए हैं?
क्या हम सोचें के
घूमती है दुनिया इसी के इर्द गिर्द
कुछ खोया-सा
मेरा जीवन कुछ खो रहा है
एक प्रेम कहानी का उदाहरण देने के लिए
(शायद इसे मुझे बड़े अक्षरों में लिखना चाहिए था)
समीप उसके शायद मैंने जिया होता जीवन अपना
जैसे कोई युवा अपने सपनों में करता है
और जैसा एक बूढ़े की यादों में ही संभव है
जिस तरह एक पियक्कड़ को खदेड़ दिया जाता है,
वैसे ही कल्पनाएँ हैं खदेड़ी जातीं
एक दिन आएगा जब लौटूंगा मैं
चमकता चेहरा लिए
पुरानी प्रवृति लिए
एक दिन आएगा जब शापित मैं
दुनिया पर खड़ा
तोडूंगा फूल तुम्हारे लिए
एक खूबसूरत ज़मीन से
और गिनूंगा साथ बैठकर हवाओं की पंखुडियां
एक रात आएगी जब
हम चाँद देखेंगे
भूसे की गंध के साथ
एक पल होगा जब अर्थ खो देंगे शब्द
और फिर भी हम एक दुसरे को समझेंगे
अब हमारा कोई तालमेल नहीं
मृत्यु के गोद लिए बच्चों से
और धुल से
हम सरकते जायेंगे
पृथ्वी की ओर,
जो हमें समा लेगी अपनी बड़ी सी बनावट में|
प्राग
काव्य के मैग्मा पर बहता शहर
तूफान से पहले की सी शांति, उत्साह, स्वर्ग और नरक के बीच की घूमघुमैया,
यहाँ मिलेंगे आपको राजा, संत, मूर्ख, वैज्ञानिक, सन्यासी, शूरवीर, संगीतकार, आज-कल के कवि
सच्चा आरोप असली और नकली का, इतिहास का और पुरानी कहावतों का
रोशनियाँ और पर्छाइयाँ, रोशनियाँ बिना पर्छाइयों के और कुछ अमर पर्छाइयाँ
फूसफुसाहटें  दफ्न ट्राम की आवाज़ों में
पार्क, जो भरते हुए से और खाली होते हुए से अजीब से कानूनों पर
तीखी भीड़, आलसी नदी जैसी
घुमते  आकार, आज़ाद, खुश, ऊट पटांग ज़िन्दगी और आरामों के लिए तैयार
सुन्दर इंग्लिश आदमी खूबसूरत जापानी औरतों के साथ गले लगते गाड़ियों में
उत्तरी क्षेत्र के वृद्द एक उदास दिखावे और आर्थिक सुरक्षा से ढके सुन्दर छतों पर बैठे, चबाते हुए हसीं
कला के खाने लायक नमूने सुन्दर मेजों पर
जवान पर्यटक लादे हुए झोला, होटलों के सामने देखते मेनू
बेपरवाह समलेंगिक, हाथ में सिटी गाइड लिए
बेघर बदकिस्मतों के झुण्ड, बड़ी जेबों मैं बोतलें लिए मांगते भीख में सिगरेट पर्यटकों से
जैसे ही पुलिस जाती हो अदृश्य डरे और पागल कुत्तों के साथ
इमारतें: बैचैन हाथ स्वर्ग की ओर बढे हुए
पुल: छोटे छोटे विराम बहते खोये वक़्त पर
जीवित और मृत घटनाएं, पल, अमर चित्र, कैद कैमरों में
बेबीलोन, जहाँ भाषा मिलती है घुलती है, पर लोग समझ जाते है एक दुसरे को
हर्बल के साथ एक बीएर उसके पसंदीदा पब में, मुचा का एक दौरा, जच्य्म, टोपोल और हवेल के साथ
एक सैर किलों तक
काफ्का आपके नमस्कार को  नज़रंदाज़ करते, खोते हुए दुखी हो खिडकियों से
एक बार आओ कल्पना में ही, उड़ती प्रवासी चिड़ियों की तरह
प्राग:  इतिहास की भूमिका