Tuesday, January 01, 2013

नए साल की शुभकामनाएँ !

सवेश्वर दयाल सक्सेना की कविता के साथ बीइंग पोएट के पाठकों को नया साल बहुत-बहुत मुबारक़ : बीइंग पोएट
खेतों की भेड़ों पर धूल-भरे पाँव को,
कुहरे में लिपटे उस छोटे-से गाँव को
,
नए साल की शुभकामनाएँ!
जाते के गीतों को, बैलों की चाल को,
करघे को कोल्हू को
, मछुओं के जाल को,
नए साल की शुभकामनाएँ!
इस पकती रोटी को, बच्चों के शोर को,
चौंके की गुनगुन को
, चूल्हे की भोर को,
नए साल की शुभकामनाएँ!
वीराने जंगल को, तारों को, रात को,
ठण्डी दो बंदूकों में घर की बात को
,
नए साल की शुभकामनाएँ!
इस चलती आँधी में हर बिखरे बाल को,
सिगरेट की लाशों पर फूलों-से ख़्याल को
,
नए साल की शुभकामनाएँ!
कोट के गुलाब और जूड़े के फूल को,
हर नन्ही याद को
, हर छोटी भूल को,
नए साल की शुभकामनाएँ!
उनको जिनने चुन-चुनकर ग्रीटिंग कार्ड लिखे,
उनको जो अपने गमले में चुपचाप दिखे
,

नए साल की शुभकामनाएँ!