Thursday, March 21, 2013

नज़्म कहते हो तो कहो मगर ये याद रहे !


दोस्तों! आज विश्व कविता दिवस (21 मार्च) है। यूनेस्को द्वारा 1999 में घोषित यह दिन अलग-अलग देशों में अलग-अलग तारीख को मनाया जाता है। यूरोप के कुछ देशों ने रोम के महान कवि विर्गिल (पब्लियस वर्गिलिउस मारो) के जन्मतिथि 15 अक्टूबर को विश्व कविता दिवस के रूप में चुना। कनाडा और कुछ देशों में कविता दिवस नवम्बर में भी मनाने की रिवायत है। इस मौक़े पर पेश कर रहा हूँ अपनी ही एक नज़्म जिसका उनवान है मशवरा : त्रिपुरारि कुमार शर्मा    
नज़्म कहते हो तो कहो मगर ये याद रहे
कि तुम कह रहे हो नज़्म ये जिसकी ख़ातिर
उसके आँसू की कोई बूँद न आने पाए
नज़्म गीली जो अगर हो गई किसी कारण
तुम्हारी आँख की पुतली से चिपक जाएगी
सूख जाएगी जैसे सूखे लहू का धब्बा
खुरच दो भी अगर दाग़ तो रह जाएगा
एक उँगली के इशारे से लोग पूछेंगे
तुम्हारे दाग़ में दुनिया किसी की देखेंगे
जो आँख मूँद भी लो फिर भी भीगी पलकों पर
एक टूटा हुआ चेहरा किसी का उभरेगा
तुम्हारी साँस के सीने पे पाँव रखेगा
तुम्हारी धड़कनों की धज्जियाँ उड़ाते हुए
सफ़ेद ओस के टुकड़ों को भर के मुट्ठी में
चमकती चुप्पियों को चाँद में चुनवाएगा
कैसे देखोगे अपनी आह को तुम मरते हुए
अपनी आवाज़ को तुम किस तरह दफ़नाओगे
ऐसे हालात में एक नज़्म भी कह पाओगे

6 comments:

  1. बेहद खूबसूरत.......अनमोल मशवरा....
    बधाई त्रिपुरारी.
    अनु

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  2. बेहतरीन नज्म ... जीवंत भाव लिए पंक्तियाँ

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  3. is rachna ke gehre bhan man ko bahut kareeb se chhu gae.

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  4. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-03-2013) के चर्चा मंच 1193 पर भी होगी. सूचनार्थ

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  5. bahut umda nazm, Tripurari ji, nazm kehne ki rajneeti par, swakeeya, parkiya prem par likhne ki purani rajneeti par, aur bhi awasaron par likhne ki rajneeti par, bahut khoob, badhai,mujhe Madan Vatsyayan ki kavitayein bahut yaad aayin,

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  6. बहुत सुन्दर ...
    पधारें " चाँद से करती हूँ बातें "

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