Saturday, December 24, 2011

क़तील शिफ़ाई की जन्मतिथि !

क़तील शिफ़ाई
ज़िंदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं... मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा...। इस तरह का एहसास अपनी क़लम में रखने वाले उर्दू के मशहूर शायर और गीतकार क़तील शिफ़ाई (औरंगज़ेब ख़ान) की जन्मतिथि 24 दिसंबर है। वर्तमान पाकिस्तान में जन्मे (1919) इस शायर ने भारतीय और पाकिस्तानी सिनेमा में कई सुपरहिट गीत लिखे। मेंहदी हसन, ग़ुलाम अली, जगजीत सिंह समेत कई ग़ज़ल गायकों ने, क़तील के लफ़्ज़ों को लिबास समझ कर, अपनी आवाज़ को पहनाया है। क़तील की ज़िंदगी में कई मकाम पेश आए। दुकानदारी से लेकर पत्रिका के सम्पादन तक। इनकी बीस से ज़्यादा किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। 11 जुलाई 2001 तक साँस ने क़तील का साथ दिया। मगर उनकी शायरी हमेशा हमारी नसों में बहते हुए गर्म ख़ून की तरह ज़िंदा है। आज उनकी जन्मतिथि के मौक़े पर पेश है उनकी कुछ मशहूर ग़ज़लें : बीइंग पोएट
1.
वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे 
मैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न करे
 
रहेगा साथ तेरा प्यार ज़िन्दगी बनकर 
ये और बात मेरी ज़िन्दगी वफ़ा न करे
 
ये ठीक है नहीं मरता कोई जुदाई में 
ख़ुदा किसी से किसी को मगर जुदा न करे
 
सुना है उसको मोहब्बत दुआयें देती है 
जो दिल पे चोट तो खाये मगर गिला न करे
 
ज़माना देख चुका है परख चुका है उसे 
क़तील जान से जाये पर इल्तजा न करे 
2.
ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाए मुझे
कि संग तुझ पे गिरे और ज़ख़्म आए मुझे

मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये को
बदन मेरा ही सही दोपहर न भाए मुझे

ब-रंग-ए-ऊद
 मिलेगी उसे मेरी ख़ुश्बू
वो जब भी चाहे बड़े शौक़ से जलाए मुझे

मैं घर से तेरी तमन्ना पहन के जब निकलूँ
बरह्ना
 शहर में कोई नज़र न आए मुझे

वही तो सब से ज़्यादा है नुक्ताचीं मेरा
जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाए मुझे

मैं अपने दिल से निकालूँ ख़्याल किस-किस का
जो तू नहीं तो कोई और याद आए मुझे

ज़माना दर्द के सहरा तक आज ले आया
गुज़ार कर तेरी ज़ुल्फ़ों के साए -साए मुझे

वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम
दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आए मुझे

वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यों नहीं करता
वो बदगुमाँ है तो सौ बार आज़माए मुझे

मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ
 ‘क़तील’
ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाए मुझे
 
3.
गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं

बच निकलते हैं अगर आतिह-ए-सय्याद से हम
शोला-ए-आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं

ख़ुदनुमाई तो नहीं शेवा-ए-अरबाब-ए-वफ़ा
जिन को जलना हो वो आराम से जल जाते हैं

शमा जिस आग में जलती है नुमाइश के लिये
हम उसी आग में गुमनाम से जल जाते हैं

जब भी आता है मेरा नाम तेरे नाम के साथ
जाने क्यूँ लोग मेरे नाम से जल जाते हैं

रब्ता बाहम पे हमें क्या न कहेंगे दुश्मन
आशना जब तेरे पैग़ाम से जल जाते हैं
4.
किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह
वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह

किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी
छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह

बढ़ा के प्यास मेरी उस ने हाथ छोड़ दिया
वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह

सितम तो ये है कि वो भी ना बन सका अपना
क़बूल हमने किये जिसके ग़म खुशी कि तरह

कभी न सोचा था हमने
क़तील उस के लिये
करेगा हमपे सितम वो भी हर किसी की तरह
5.
अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको 
मैं हूँ तेरा नसीब अपना बना ले मुझको
 

मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के मानी
 
ये तेरी सादादिली मार न डाले मुझको
 

मैं समंदर भी हूँ
मोती भी हूँग़ोताज़न भी 
कोई भी नाम मेरा लेके बुला ले मुझको
 

तूने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी
 
ख़ुदपरस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझको
 

कल की बात और है मैं अब सा रहूँ या न रहूँ
 
जितना जी चाहे तेरा आज सता ले मुझको
 

ख़ुद को मैं बाँट न डालूँ कहीं दामन-दामन
 
कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको
 

मैं जो काँटा हूँ तो चल मुझसे बचाकर दामन
 
मैं हूँ गर फूल तो जूड़े में सजा ले मुझको
 

मैं खुले दर के किसी घर का हूँ सामाँ प्यारे
 
तू दबे पाँव कभी आ के चुरा ले मुझको
 

तर्क़-ए-उल्फ़त की क़सम भी कोई होती है क़सम
 
तू कभी याद तो कर भूलने वाले मुझको
 

वादा फिर वादा है मैं ज़हर भी पी जाऊँ
क़तील’ 
शर्त ये है कोई बाँहों में सम्भाले मुझको
 
6.
परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ
सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ

हँसो और हँसते-हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में
हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ

तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया
ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ

कहे जाते हो रो-रो के हमारा हाल दुनिया से
ये कैसी राज़दारी है सितारों तुम तो सो जा

हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा
यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ

हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे
अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ