Thursday, February 14, 2013

मधुरतम आनंद और क्रुरतम दुख है प्रेम !


वेलेंटाइन डे के मौक़े पर पेश है कुछ कथन जो विद्वानों और दार्शनिकों द्वारा कहे गए हैं : बीइंग पोएट
  • प्रेम एक गम्भीर मानसिक रोग है। - प्लेटो
  • प्रेम में प्रत्येक व्यक्ति अंधा होता है। - प्रोर्टियस
  • मधुरतम आनंद और क्रुरतम दुख है प्रेम। - बेली
  • दिमाग़ की अव्वल दर्ज़े की कमजोरी है प्रेम। - ड्राइडेन
  • हमारा पहला और अंतिम प्यार है ख़ुद का प्यार। - बोबी
  • प्रेम ख़ुद मिलता है, इसे ख़रीदा नहीं जा सकता। - लांगफेलो
  • जब किसी ने भी प्यार किया, पहली नज़र में नहीं किया। - मार्लोवे
  • वे कितने ही बुद्धिमान क्यों न हों, प्यार में मूर्ख ही होते हैं। - जोशु कुक
  • यदि आप प्यार पाते हैं तो प्यार और भी प्यारा हो जाता है। - फ्रैंकलिन
  • प्यार चाहना अच्छा है, पर प्यार देना उससे भी अच्छा है। - शेक्सपीयर
  • प्रेमी-प्रेमिका एक साथ होने पर भी नहीं उबते क्योंकि ये सिर्फ़ अपने बारे में बात करते हैं। - लॉ रोचेफोकोल्ड
  • आदमी थोड़ा और बार-बार प्यार करता है, जबकि औरत हद से अधिक पर कभी कभी ही करती है। - बस्ता
  • नीली आँखें कहती हैं- मुझे प्यार करो नहीं तो मर जाऊँगी। काली आँखें कहती हैं- मुझे प्यार करो नहीं तो तुम्हें मार दूँगी। - स्पेनिश कहावत 
  • आदमी का प्रेम प्यार से शुरू हो कर औरत पर समाप्त हो जाता है जबकि औरत का प्रेम आदमी से शुरू हो कर प्यार पर समाप्त होता है। - रेमी डे गौरमेंट
  • यह कहना पूरी ज़िंदगी आप सिर्फ़ एक को प्यार करेंगे। ठीक वैसे ही है जैसे यह कहना कि आपकी पूरी ज़िंदगी तक एक ही मोमबत्ती जलती रहेगी। - टॉलस्टाय
:: कुछ शेर ::
  • इश्क़ मिन्नत-कशे-क़रार नहीं / हुश्न मज़बूरे-इंतज़ार नहीं - फ़ैज़
  • इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखो / सारे आलम में भर रहा है इश्क़ - मीर
  • इश्क़ मासूक़ इश्क़ आशिक़ है / यानि अपना ही मुब्तिला है इश्क़ - मीर
  • मरहले तय इश्क़ के अकसर हुए / मंज़िल-ए-दुश्वार बाक़ी रह गयी - दाग़
  • मज़े इश्क़ के बस वही जानते हैं / कि जो मौत को ज़िंदगी जानते हैं - दाग़
  • इश्क़ मुझको नहीं वहशत ही सही / मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही - ग़ालिब
  • इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया / वर्ना हम भी आदमी थे काम के - ग़ालिब
  • रोने से और इश्क़ में बेबाक़ हो गये / धोये गये हम ऐसे कि बस पाक हो गये - ग़ालिब
  • इश्क़ हसरत को है ग़ज़ल के सिवा / न कसीदे, न मसनबी की हवस - हसरत जयपूरी
  • सीने में दाग़े-इश्क़ को रहने दे यारा साज़ / शायद वे बादे-मर्ग चिराग़े-मज़ार हो - जफ़र
  • इस इश्क़-ए-ख़ास को हर एक से छुपाए हुए / गुज़र गया ज़माना गये लगाये हुए - फ़ैज़
  • इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब / कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे - ग़ालिब
  • इश्क़ ही अपना रहबर है इश्क़ ही है रहनुमा / ऐ जफ़र हाजत किसी की रहनुमाई की नहीं - जफ़र
  • तुम्हारे इश्क़ में हम ऐ बुतो क्या-क्या न रखते हैं / जिगर सदचाक रखते हैं, दिले-दीवाना रखते है - जफ़र 
  • हज़ारों इश्क़ में ऐ हज़रते-दिल रंजो-ग़म पहुँचे / पर अफसोस अपने मकसद के न तुम पहुँचे न हम पहुँचे - जफ़र