तुम्हारी आँखों में
उमड़ आई इन दो नदियों ने
मुझे अपने ऐसे डुबो लिया है
जैसे गर्मियों की तपती दोपहरी में
मेरे नगर की नदियाँ अपने संग में मुझे डुबो लेती हैं
गंगा जमुना ही नहीं
लोग कहते हैं कि मेरे नगर में
एक तीसरी नदी भी बहती है ‘सरस्वती’
जो कभी दिखाई नहीं देती
जो कभी दिखाई नहीं देती वह व्यथा है
जो दिल-ब-दिल बहती है
और चेहरों पर जिसका कोई आभास नहीं होता
तुम्हारी इन डबडबाई आँखों की
उसी तीसरी नदी ने मुझे डुबो लिया है
क्या कहा?
तुम्हारी वो तीसरी अदृश्य नदी मैं हूँ
तो फिर इन आँखों को चुपचाप पोंछ डालो
और मुझे पहले की तरह अदृश्य बहने दो।
उमड़ आई इन दो नदियों ने
मुझे अपने ऐसे डुबो लिया है
जैसे गर्मियों की तपती दोपहरी में
मेरे नगर की नदियाँ अपने संग में मुझे डुबो लेती हैं
गंगा जमुना ही नहीं
लोग कहते हैं कि मेरे नगर में
एक तीसरी नदी भी बहती है ‘सरस्वती’
जो कभी दिखाई नहीं देती
जो कभी दिखाई नहीं देती वह व्यथा है
जो दिल-ब-दिल बहती है
और चेहरों पर जिसका कोई आभास नहीं होता
तुम्हारी इन डबडबाई आँखों की
उसी तीसरी नदी ने मुझे डुबो लिया है
क्या कहा?
तुम्हारी वो तीसरी अदृश्य नदी मैं हूँ
तो फिर इन आँखों को चुपचाप पोंछ डालो
और मुझे पहले की तरह अदृश्य बहने दो।
No comments:
Post a Comment