इस बात से इंकार करना मुश्किल है कि भारत में दो-दो भारत बसते हैं। मेरे लिए भारत के क्या मायने हैं? इस बात की ओर इशारा करती है मेरी यह कविता 'बहुत फ़र्क है तुम्हारे और मेरे भारत में' : त्रिपुरारि कुमार शर्मा
तुम्हारा
भारत-
एक
डंडे की नोक पर फड़फड़ाता हुआ तीन रंगों का चिथड़ा है
जो किसी दिन अपने ही पहिए के नीचे आकर
तोड़ देगा अपना दम
तुम्हारे दम भरने से पहले।
मेरा भारत-
चेतना की वह जागृत अवस्था है
जिसे किसी भी चीज़ (शरीर) की परवाह नहीं
जो अनंत है, असीम है
और बह रही है निरंतर।
जो किसी दिन अपने ही पहिए के नीचे आकर
तोड़ देगा अपना दम
तुम्हारे दम भरने से पहले।
मेरा भारत-
चेतना की वह जागृत अवस्था है
जिसे किसी भी चीज़ (शरीर) की परवाह नहीं
जो अनंत है, असीम है
और बह रही है निरंतर।
तुम्हारा
भारत-
सफ़ेद काग़ज़ के टुकड़े पर
महज कुछ लकीरों का समन्वय है
जो एक दूसरे के ऊपर से गुज़रता हुआ
आपस में ही उलझ कर मर जाएगा एक दिन।
मेरा भारत-
एक स्वर विहीन स्वर है
एक आकार विहीन आकार है
जो सिमटा हुआ है ख़ुद में
और फैला हुआ है सारे अस्तित्व पर।
सफ़ेद काग़ज़ के टुकड़े पर
महज कुछ लकीरों का समन्वय है
जो एक दूसरे के ऊपर से गुज़रता हुआ
आपस में ही उलझ कर मर जाएगा एक दिन।
मेरा भारत-
एक स्वर विहीन स्वर है
एक आकार विहीन आकार है
जो सिमटा हुआ है ख़ुद में
और फैला हुआ है सारे अस्तित्व पर।
तुम्हारा
भारत-
सरहदों में सिमटा हुआ ज़मीन का एक टुकड़ा है
जिसे तुम ‘माँ’ शब्द की आड़ में छुपाते रहे
और करते रहे बलात्कार हर एक लम्हा
लाँघकर निर्लज्जता की सारी सीमाओं को।
मेरा भारत-
शर्म के साए में पलती हुई एक युवती है
जो सुहागरात में उठा देती है अपना घुँघट
प्रेमी की आगोश में बुनती है एक समंदर
एक नए जीवन को जन्म देने के लिए।
सरहदों में सिमटा हुआ ज़मीन का एक टुकड़ा है
जिसे तुम ‘माँ’ शब्द की आड़ में छुपाते रहे
और करते रहे बलात्कार हर एक लम्हा
लाँघकर निर्लज्जता की सारी सीमाओं को।
मेरा भारत-
शर्म के साए में पलती हुई एक युवती है
जो सुहागरात में उठा देती है अपना घुँघट
प्रेमी की आगोश में बुनती है एक समंदर
एक नए जीवन को जन्म देने के लिए।
तुम्हारा
भारत-
राजनेताओं और तथा-कथित धर्म के ठेकेदारों
दोनों की मिली-जुली साज़िश है
जो टूटकर बिखर जाएगी किसी दिन
अपने ही तिलिस्म के बोझ से दब कर।
मेरा भारत-
कई मोतियों के बीच से गुज़रता हुआ
माला की शक्ल में वह धागा है
जो मोतियों के बग़ैर भी अपना वजूद रखता है।
बहुत फ़र्क है तुम्हारे और मेरे भारत में!
राजनेताओं और तथा-कथित धर्म के ठेकेदारों
दोनों की मिली-जुली साज़िश है
जो टूटकर बिखर जाएगी किसी दिन
अपने ही तिलिस्म के बोझ से दब कर।
मेरा भारत-
कई मोतियों के बीच से गुज़रता हुआ
माला की शक्ल में वह धागा है
जो मोतियों के बग़ैर भी अपना वजूद रखता है।
बहुत फ़र्क है तुम्हारे और मेरे भारत में!

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ReplyDeleteअंशुमाली रस्तोगी, Vimal Chandra Pandey and 26 others like this.
Chandi Dutt Shukla
कटाक्ष. कड़ा।
Thursday at 23:10 · Unlike · 1
अंजू शर्मा
मेरा भारत-
कई मोतियों के बीच से गुज़रता हुआ
माला की शक्ल में वह धागा है
जो मोतियों के बग़ैर भी अपना वजूद रखता है।
बहुत फ़र्क है तुम्हारे और मेरे भारत में! ........wah Tripurari ji.....
Thursday at 23:14 · Unlike · 3
Lalit Kumar
भारत के कई रूप!.... त्रिपुरारी, तुम्हें आजकल कविता कोश में रेखांकित रचनाकार बनाया हुआ है -ताकि अधिक से अधिक पाठक सीधे तुम्हारी बेहतरीन रचनाओं तक पहुँच सकें।
Thursday at 23:18 · Unlike · 3
अंजू शर्मा
aaj kavita kosh mein Tripurari ji ki AARUSHI kavita padhi....bahut achhi lagi.....behad marmik
Thursday at 23:20 · Unlike · 1
Sanjay Sharma · Friends with Lalit Kumar
Buhut achchi lagi ...
Thursday at 23:27 · Unlike · 1
Natwar Sharma
Bharat ko Bharat kahne par ACHHA laga,,, pata nahi ye INDIA kyo bana?????
Thursday at 23:31 · Unlike · 1
Sanjay Sharma · Friends with Lalit Kumar
Yes Natwar. Its time, even in english, we start calling our country by its own name and not by what the world calls it. I dislike when people call YOG- Yoga, GANESH- Ganesha......
Thursday at 23:37 · Unlike · 2
Lokesh Srivastava
Ye tera mera kyo bhai???
Friday at 00:37 · Unlike · 1
Ravi Chaudhary · 2 mutual friends
wakai ek kavi aur sadharan vyakti ki soch me ye antar hota hai.....
Friday at 05:52 · Unlike · 2
Om Dheeraj
अद्भुत..
Friday at 10:42 · Unlike · 1
Vipin Choudhary
kamal kee kavita lekh dali hai tumne babu shandar aage bhee asee hee kavitaon ka intzaar rahega
Yesterday at 09:14 · Unlike · 1
Vimal Chandra Pandey
तुम्हारा भारत-
राजनेताओं और तथा-कथित धर्म के ठेकेदारों
दोनों की मिली-जुली साज़िश है
जो टूटकर बिखर जाएगा किसी दिन
अपने ही तिलिस्म के बोझ से दब कर....bahut sahi guru, chha gaye, gin gin ke tamache, badhai
Yesterday at 11:28 · Unlike · 2
तुम्हारा भारत-
Deleteसरहदों में सिमटा हुआ ज़मीन का एक टुकड़ा है
जिसे तुम ‘माँ’ शब्द की आड़ में छुपाते रहे
और करते रहे बलात्कार हर एक लम्हा
लाँघकर निर्लज्जता की सारी सीमाओं को।
मेरा भारत-
शर्म के साए में पलती हुई एक युवती है
जो सुहागरात में उठा देती है अपना घुँघट
प्रेमी की आगोश में बुनती है एक समंदर
एक नए जीवन को जन्म देने के लिए।
behatarin soch....